पुलीस मारपीट करे/ तो क्या हम भी मारपीट सकते है?Self Defence में मौत-जाने

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अगर पुलिस आधिक प्रहार करती है|तो व्यक्ति को सीमाओं में रहकर खुद को सुरक्षित करने का अधिकार है|इसको और अधिक् बिस्तार से जानते है|की अगर पुलीस मारपीट करे/ तो क्या हम भी मारपीट सकते है? सेल्फ-डिफेंस में आप किस हद तक जा सकते हैं खुद को बचाने में- इसके लिए क्या क्या कानून हैं? चलिए सीखते हैं|

पुलिस मारे तो क्या करें?

हमारे देश का जो संविधान है, हमें यह सिखाहता है कि हम रेस्पेक्ट करें। हमारे देश की वर्दी की। लेकिन उस वर्दी को पहनने के बाद कोई व्यक्ति जो पुलिस वाला है, गलत इस्तेमाल करे, उसका गाली गलौज करे, आम जनता के साथ अभद्र व्यवहार करे और मारपीट तक कर दे।

  • सुप्रीम कोर्ट क्या कहता है इस बारे में कि एक पुलिस की यह ड्यूटी है कि अगर वह ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर रहा जो अपराधी है, उसके साथ भी मारपीट न करें। उसको उसके सारे अधिकार बताओ। डी।के। बासु अरसे स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल के जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही कि आप किसी व्यक्ति का अपमान नहीं कर सकते। पुलिस को कही तो गाली गलौज, अभद्र व्यवहार, मारपीट तो बहुत दूर की बात हो गई।
  • कोई कानून तोड़ दिया तो पुलिस को यह अधिकार है कि वह उनका फाइन करे। अब वह फाइन नहीं कर रहे हैं। पुलिस के साथ ही मिसबिहेव कर रहे हैं और हमले की पोजीशन में आ गए तो पुलिस को यह अधिकार है कि वह उनको अरेस्ट कर ले। और पिटाई भी कर सकते है|
कानून का पालन नहीं करना

अगर पुलिस अधिक प्रहार का इस्तेमाल करती है, तो व्यक्तियों को कानून की सीमाओं में रहकर खुद को सुरक्षित करने का अधिकार है।

  • मान ले कि पुलिस वाले ने आप पर जानलेवा हमला किया,जैसे आपका हाथ टूट गया ‚आपकी आँख या कान फूट जाए‚ आपके गुप्तांग पर गंभीर चोट लग लग जाय, या आपको जान से मारना चाहा,तो आप अपने सुरक्षा के लिए पुलिस पर हाथ उठा सकते है|लेकिन उस घटना का अगर आप video बना लें| ताकि आप पुलिस के खिलाफ शिकायत करने के लिए आपको पास ठोस सबूत हो| अति उत्तम काम होता आपके द्वारा|
  • हाथ उठाने के साथ आप पुलिसकर्मी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 99 के तहत मुकदमा दर्ज करा सकते हैं
  • यह कोर्ट के अंदर तय हो जाता है,की आपने मजबूरी में आपने उस पर अटैक किया था,जिस वजह से वह मरा था,तो कोर्ट आपको बरी करता है।
  • यह कोर्ट काम होता है,की आप अपने डिफेंस में उस पुलिसवाले को मारा या नहीं।

👉 आप खुद अटैक कर रहे हो? पुलिस वाले पर किसी भी सिचुएशन के अंदर हाथ नहीं उठा सकते।आंख भी फूट जाएगी तो भी आपको नहीं मिलेगा डिफेंस। यह तब है जब आपने कुछ नहीं किया।

पीड़ितों को पुलिस विभाग में शिकायत दर्ज करना चाहिए, और असंतुष्ट होने पर उच्च प्राधिकृत्यों के पास जाना चाहिए। सघड़ी की गवाही के लिए घटना को दस्तावेजीकृत करें|जितना ज्यदा हो सके उतना सबूत इकट्ठा करे||

घटना को मीडिया के साथ साझा करें ताकि जनता को जागरूकता मिले। सामाजिक दबाव अधिक गहराई से छानने और अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है|

पुलिस अधिकारी की निलंबन की मांग करें और घटना की विस्तृत जांच करें। इससे कानूनी प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित होती है|ताकि आपके साथ जो घटना घटी, वह किसी और के साथ न घटे|

सुप्रीम कोर्ट के वकील डी. बी. गोस्वामी ने बताया है कि आईपीसी की धारा-96 के अंतर्गत सेल्फ-डिफेंस का उल्लेख है।

  • धारा-97 के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति को अपने शरीर और संपत्ति की रक्षा का अधिकार है, और उसे इसके लिए सेल्फ-डिफेंस में हमला करने का अधिकार है।
  • धारा-99 कहती है कि सेल्फ-डिफेंस को तर्कसंगत होना चाहिए, अर्थात् अपराधी को उतना ही क्षति पहुंचाई जा सकती है जितना आवश्यक है।
  • कानूनी विशेषज्ञ गोस्वामी ने बताया है कि धारा-100 के अनुसार, सेल्फ-डिफेंस में अगर किसी अपराधी की मौत हो जाती है, तो बचाव संभव है,
  • लेकिन इसमें यह आवश्यक है कि ऐसा कॉन्फॉर्म करने के लिए यह कानूनी प्रावधान के अनुसार किया गया हो। अगर गंभीर चोट लगने का खतरा हो, या फिर बलात्कार या दुराचार का खतरा हो, अपराधी अगर अपहरण की कोशिश में हो, तो ऐसी स्थिति में सेल्फ-डिफेंस में किए गए हमले में, अगर अपराधी की मौत हो जाती है, तो बचाव किया जा सकता है। इसमें यह आवश्यक है कि साबित हो कि यह हमला उचित कारणों से किया गया था।
  • भारतीय दंड संहिता, 1860 में पुलिस अधिकारियों पर हमला या उनके काम में बाधा डालने पर सजा हो सकती है।
  • आईपीसी की धारा 186, ‘लोक सेवक के कार्यों के निर्वहन में बाधा डालना,’ हमला या अधिकारियों के काम में बाधा डालने के लिए सजा प्रदान करती है।
  • इस धारा के तहत, दोषी को तीन महीने की जेल सजा, 500 रुपये तक का आर्थिक जुर्माना, या दोनों हो सकता है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 332 लोक सेवक को उनके काम से भटकाने के लिए जानबूझकर हमला करने पर सजा प्रदान करती है।
  • इस धारा के अनुसार, चोट पहुंचाने वाले को तीन साल तक की जेल सजा, आर्थिक जुर्माना, या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।
  • आपके ब्लॉग में, आपने पुलिस के अत्याचार से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की है, जिसमें शामिल है कि पुलीस मारपीट करे/ तो क्या हम भी मारपीट सकते है? , तो क्या हमें भी हिंसा का साधन करना उचित है, अगर पुलिस हमला करे तो हमें क्या करना चाहिए, और पुलिस अधिकारी के साथ मारपीट का क्या परिणाम हो सकता है। समाप्त करने के लिए, यह स्पष्ट है कि पुलिस के अत्याचार का सामना करने के लिए एक सूक्ष्म दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
  • जबकि पुलिस के अत्याचार की घड़ी चिंताजनक हैं और इसे निंदा किया जाना चाहिए, हिंसा का साधन करना एक समाधान नहीं है। बजाय इसके, इसमें व्यावसायिक परिवर्तन, अधिक जिम्मेदारी, और कानूनी तौर पर सुधार की आवश्यकता है। नागरिकों को न्याय और जिम्मेदारी की मांग करने का अधिकार है, जिसे की निर्दिष्ट और शांतिपूर्ण तरीकों से किया जा सकता है, जैसे कि शिकायत दर्ज करना, शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होना, और नीति में परिवर्तन की प्रोत्साहन करना।
  • महत्वपूर्ण है कि हिंसा केवल क्षति के चक्र को बढ़ाती है और इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान में योगदान नहीं करती है। खुले संवाद को प्रोत्साहित करके, पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए, और नागरिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भूमिका निभाकर, व्यक्तियों को बदलाव की सृष्टि करने में योगदान किया जा सकता है।

समाप्त करते हुए, ध्यान केंद्रित होना चाहिए कि परिवर्तन लाने के लिए निर्माणात्मक और शांतिपूर्ण मार्गों पर, यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पुलिस और नागरिक एक समाज में रह सकते हैं जहां न्याय, उदारता, और समानता प्रमुख हैं।


FAQ

क्या पुलिस को आपको मारने का अधिकार है?

मान ले कि पुलिस वाले ने आप पर जानलेवा हमला किया,जैसे आपका हाथ टूट गया ‚आपकी आँख या कान फूट जाए‚ आपके गुप्तांग पर गंभीर चोट लग लग जाय, या आपको जान से मारना चाहा,तो आप अपने सुरक्षा के लिए पुलिस को आपको मारने का अधिकार है| लेकिन उस घटना का अगर आप video बना लें| ताकि आप पुलिस के खिलाफ शिकायत करने के लिए आपको पास ठोस सबूत हो| अति उत्तम काम होता आपके द्वारा|

क्या पुलिस को पीटने का अधिकार है?

नहीं लेकिन”कोई कानून तोड़ दिया तो पुलिस को यह अधिकार है कि वह उनका फाइन करे। अब वह फाइन नहीं कर रहे हैं। पुलिस के साथ ही मिसबिहेव कर रहे हैं और हमले की पोजीशन में आ गए तो पुलिस को यह अधिकार है कि वह उनको अरेस्ट कर ले। और पिटाई भी कर सकते है|”

पुरुष पर हाथ उठाने पर कौन सी धारा लगती है?

धारा 332 के तहत दोषी को तीन साल तक की जेल की सजा सुनाई जाएगी,या जुर्माना भरना पड़ेगा या फिर दोनों सजाएं भुगतना पड़ सकता है।आपको

महिला को गाली देने पर कौन सी धारा लगती है?

अश्लील गालियां देना भारतीय दंड संहिता की धारा 294 में एक दंडनीय अपराध है|

पुलिस पर हाथ उठाने पर कौन सी धारा लगती है?

भारतीय दंड संहिता, 1860 में पुलिस अधिकारियों पर हमला या उनके काम में बाधा डालने पर सजा हो सकती है।
आईपीसी की धारा 186, ‘लोक सेवक के कार्यों के निर्वहन में बाधा डालना,’ हमला या अधिकारियों के काम में बाधा डालने के लिए सजा प्रदान करती है।
इस धारा के तहत, दोषी को तीन महीने की जेल सजा, 500 रुपये तक का आर्थिक जुर्माना, या दोनों हो सकता है।

अवैध संबंध में कौन सी धारा लगती है?

आईपीसी के धारा 497 और 498 |

अपना कीमती समय देने के लिए धनयबाद ,आपको फिर कोई प्रश्न है तो आप बिलकुल कमेंट में हमसे पूछ सकते है या हमे कांटेक्ट भी कर सकते है। और आप सभी का धन्यवाद |

नमस्कार दोस्तों, मैं सौरभ कुमार, एक Professional Blogger हूँ और इस ब्लॉग का Founder, Author हूँ. इस ब्लॉग पर मैं नियमित रूप से उपयोगी नईं-नईं जानकारी शेयर करता रहता हूँ।

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